Sunday, 17 August 2014

बरछी-भाले नहीं अब संगीनों का साया श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सुरक्षा चक्र के बीच जन्मेंगे सुदर्शन चक्रधारी

बरछी-भाले नहीं अब संगीनों का साया
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सुरक्षा चक्र के बीच जन्मेंगे सुदर्शन चक्रधारी



फिर ताजा होगा द्वापर युगीन घटनाक्रम
अर्ध सैनिक बलों का रहेगा कड़ा पहरा

 राजा कंस के कारागार में सशस्त्र प्रहरियों के बीच भाद्रपद अष्टमी की मध्य रात्रि को अजन्मे ने जन्म लिया। उस राजा कंस ने गर्भग्रह पर सख्त पहरा बैठा दिया था, लेकिन उसके बाद बिना किसी के पहरे के श्रीकृष्ण जन्मस्थान के गर्भग्रह में जन्मोत्सव मनाया जाता रहा। 1992 के बाद जन्मस्थान पर फिर सख्त पहरा बैठ गया। खासकर जन्मोत्सव के दिन तो शासन-प्रशासन यहां सुरक्षा व्यवस्था में सारी ताकत झोक देता है। हजारों संगीनों के साए में कान्हा प्रकटयोत्सव मनाया जाता है। फर्क इतना है कि अब संगीनें कान्हा के यहां से बच निकलने के लिए नहीं, बल्कि उनकी जन्मस्थली और भक्तों की सुरक्षा में खड़ी हुई हैं।
द्वापर युगीन कंस का प्राचीन कारागार तो अब नहीं रहा, लेकिन पहरा वैसा ही है जैसा द्वापर में मथुरा के राजा कंस ने यहां बैठाया था। अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद श्रीकृष्ण जन्मस्थान के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात कर किए जाने का सिलसिला अब तक चल रहा है।  दिनों-दिन सुरक्षा व्यवस्था बढ़ रही है। श्रद्धालुओं को प्रवेश के लिए तमाम बंदिशों से भले गुजरना पड़ रहा हो, लेकिन जन्मोत्सव का जश्न दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। देश ही नहीं विदेशों में रहने वाले हिंदुओं की नजर जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ही रहती है। अष्टमी की रात्रि ठीक 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान के गर्भगृह व भागवत भवन से उठने वाली शंख की गूंज व घंटों की गूंज समूची दुनियां में अजन्मे के जन्मने का संदेश देगी। परंतु, यह सब होगा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बीच।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक प्रबंधक किए हैं। द्वापर में तलवारों और बरछी-भाले लिए कंस के पहरेदार तैनात थे तो अब एके-47 जैसी संगीनें लेकर अर्ध सैनिक बल मुस्तैद किए जा रहे हैं। सीसी टीवी कैमरे पल-पल पर नजर गड़ाए हुए हैं। चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर है। सुरक्षा व्यवस्था कुछ ऐसी की जा रही है कि एक सुई भी गर्भग्रह तक न पहुंच सके। इन्हीं संगीनों के साए में उनकी जन्मस्थली पर 18 अगस्त की मध्य रात्रि महायोगी श्रीकृष्ण का प्राकट्योत्सव होगा। इसके साथ ही मथुरा ही नहीं देश-विदेश में कृष्ण का जन्मोत्सव व बधाई गायन का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। जन्मस्थान के लीला मंच पर जहां कृष्ण जन्म की लीला का मंचन किया जाएगा, वहीं भागवत भवन में लोकनृत्यों की अद्भुत छटा बिखरेगी। इससे पूर्व शहर में भगवान श्रीकृष्ण की भव्य शोभायात्राएं निकाली जाएंगीं। जन्मस्थान के साथ-साथ ब्रज के प्रमुख मंदिरों में भी जन्मोत्सव की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।

उस दिन जन्माष्टमी

अनुसार जिस दिन सूर्योदय काल में पल भर के लिए भी सप्तमी होती है, उस दिन जन्माष्टमी नहीं मानी जाती है और अगले दिन जन्माष्टमी मनाई जाती है।
17 अगस्त को सप्तमी तिथि सुबह 5.58 बजे तक है, जबकि सूर्योदय 5.53 बजे होगा। यानि कि मथुरा में सूर्योदय के पांच सैकिंड बाद तक सप्तमी है। 18 अगस्त को अष्टमी तिथि सुबह 6.06 बजे तक है और सूर्योदय सुबह 5.54 बजे तक है। इस लिहाज से 18 अगस्त को सूर्याेदय अष्टमी तिथि में होने के कारण जन्माष्टमी महोत्सव व व्रत 18 अगस्त को ही मनाया जाएगा।